मने बाबा प्यारा लागे बैठा लाल लंगोट में

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ब्यूटीफुल दरबार गया चरणों में लोट मैं,

मने बाबा प्यारा लागे बैठा लाल लंगोट में,

लाल लंगोटा हाथ में सोटा हिर्दय में श्री राम वसे,

बाल यति करू अवतारा कण कण में हनुमान वसे,

अपने भगत के दौर में खड़ा सपोर्ट में,

मने बाबा प्यारा लागे बैठा लाल लंगोट में,

चितवन मुखड़ा नैन कटीली सब देवो से न्यारा है,

भूले से भी भूले जाना रूप मेरे मन भा रहा से,

बाल रूप का फोटो देखु कर कर ओट में,

मने बाबा प्यारा लागे बैठा लाल लंगोट में,

धाये शिव और भाये रघु वर सोना सा दरबार सजा,

दुनिया के अमर बाला जी फर फर करके लाल ध्वजा,

संकट पे रे मुँह खोले से पहली चोट में,

मने बाबा प्यारा लागे बैठा लाल लंगोट में,

सोनू भगत ख्लीले आया मगन रहे भगती के माह,

होश के भी गुण गान करे जा लगन रहे भक्ति के माँ,

अशोक भगत भी पावे न डंके की चोट मेपे,

मने बाबा प्यारा लागे बैठा लाल लंगोट में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।