तेरियाँ बे परवाइयाँ साईंया

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॥ पावन पाठ ॥

तेरियाँ बे परवाइयाँ साईंया,

आप ते खावे रुखा सूखा वंडे दूध मलाइयाँ साइयाँ,

तेरियाँ बे परवाइयाँ साईंया

है तेरे वस् में तकदीरे तू बदले हाथो की लकीरे,

खुद बेघर बंजारा है पर सब को देता है जागीरे,

तेरा बीशोना है धरती का बदल तेरी रजाइयां सैयां,

तेरियाँ बे परवाइयाँ साईंया...

तू सब के दुःख में रोटा है सबका दर्द तुझे होता है,

तेरे बंदे सो जाते है,

तू बाबा न कभी सोता है,

उसका भी चाहे तू भला जो तेरी करन बुराइयां,

तेरियाँ बे परवाइयाँ साईंया.......

तेरी इक नजर की कशिश है,

पीछे पीछे तेरे ये रविश है,

मिल गए श्रदा और सबुरी हरी तृष्णा की मिटी तपिश है,

जन्नत में ले आई साई मुझे तेरी परछाईया साइयाँ,

तेरियाँ बे परवाइयाँ साईंया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।