तू मेरा जीवन आसरा मेरे शहंशाह

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तू मेरा जीवन आसरा, मेरे शहंशाह, मेरीआं अखिआ दे तारे

मैं ता बस हुंण जी रही हां इक तेरे सहारे

फड़ी ए बाहँ दाता देवीं तू छोड़ ना

चरणा नाल लाइया ए दाता देवीं विछोड़ ना

जदों दा असां तैनू जानिए, रंग मानिया, दुःख मिट गए ने सारे,

मैं ता बस हुंण जी रही हां इक तेरे सहारे

अठ्ठे पहर तेरिआ पावा कहानिआ,

चरना नाल लाइया ए दाता, बड़ीआ मेहरबानियाँ

करांगी तेरी मैं बंदगी सारी जिंदगी, मेरे प्रीतम प्यारे

मैं ता बस हुंण जी रही हां इक तेरे सहारे

अठ्ठे पहर तेरा चड़ेया सरूर रहे,

कण कण दे विच दाता तेरा ही नूर ए

करांगी तेरी मैं बंदगी, मेरे सतगुरु प्यारे

मैं ता बस हुंण जी रही हां इक तेरे सहारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।