नव दुर्गे माँ के नो रूप निराले है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन पाने वाले किस्मत वाले है,

शेल पुतरी पारवती माँ बैल पे करे सवारी,

ब्रह्म चारणी माँ है अपने ब्रह्म सुतो की प्यारी,

माथे जिसके चंदा सोहे चन्दर घटा माँ न्यारी,

जिस जिस ने माँ को धाया तन से मन से धन किस्मत वाले है,

नव दुर्गे माँ के नो रूप निराले है,....

खुश्मांड़ा माँ अपने भगतो के पापो को हरती,

माता देवी स्कन्द अपने भगतो की झोलियाँ भरती,

कात्यायनी मैया है ऋषियों की रक्षा करती,

जिसने भी माँ कह के पुकारा चाहे देव हो नर हो किस्मत वाले है,

नव दुर्गे माँ के नो रूप निराले है....

काल रात्रि देवी माँ दुष्टो को मार गिराती,

श्री माँ गोरी अपने भक्तों के मन भाहती,

सीधी धात्री माँ भक्तो के कार्य सिद्ध करवाती,

अपनी रेहमत जिन भक्तो पर माँ दुर्गे बरसाती माँ वो किस्मत वाले है,

नव दुर्गे माँ के नो रूप निराले है,

लाल चुनरिया ओड के उषा अनीता के संग गाये,

गुण तेरा माँ गाने को अजीत पवन भी आये,

तेरे गुलशन में गुल खिलते रहते है मुस्काये,

नव दुर्गे माँ के इन रूपों को जो भी पूजे हां वो किस्मत वाले है,

नव दुर्गे माँ के नो रूप निराले है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।