जग रूठे तो रूठे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जग रूठे तो रूठे रे मैहर वाली न रूठे,

शारदा भवानी मैहर वाली न रूठे,

जग रूठे तो रूठे रे मैहर वाली न रूठे,

चलो चलो चलिये दरस मां का करलें,

कंचन नीर से लोटा भर लें,

भक्ति की डोर न टूटे रे मैहर वाली न रूठे,

भोर भई दिन निकसन लागो,

बोल रही चिरैया उठो रे भाई जागो,

गैया रम्हा रही खूंटे रे मैहर वाली न रूठे,

ऊंचे पहाड़ो वाली है मेरी मैया,

डूबत पार लगादे नैया ,

दुखिया तुम्हारो जस लूटे रे मैहर वाली न रूठे,

विंदु चरण मां के फुलवा चढ़ालो,

जीवन अपना सफल बना लो,

लागी लगन नहीं छूटे रे मैहर वाली न रूठे,

द्वारा : योगेश तिवारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।