ढुंडत ढुंडत माँ के द्वारे आ गई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ढुंडत ढुंडत माँ के द्वारे आ गई,

मात तुम्हारी झांकी मुझको भा गई,

भा गई भा गई मेरी माँ,

ढुंडत ढुंडत माँ के द्वारे आ गई

देख के सूरत माता की मैं तो दीवानी हो गई,

ऐसे चढ़ी दीवानगी मैं मस्ती में खो गई,

करके दर्श तेरा मैं तो पागल हुई,

तेरी नजरो से माँ मैं तो घ्याल हुई,

पा गई पा गई तेरी किरपा माँ,

ढुंडत ढुंडत माँ के द्वारे आ गई

तेरी झांकी देख के खुशियां मन में हो रही,

कैसे मिलोगी माँ मेरी मन ही मन में सोच रही,

अब ना देर लगा मुझको अब न सत्ता मियां अपने गले तो मुझको लगा,

जप रही जप रही तेरा नाम,

ढुंडत ढुंडत माँ के द्वारे आ गई

तेरा द्वारा यह मियां सब को प्यारा लगता है,

मैंने सुना है द्वार पे तेरे भाग्ये सबका बनता है,

मैया खाली झोली मेरी भर जाओ ना,

किरपा अपनी मुझपे बरसाओ ना,

ध्या रही ध्या रही तेरा नाम,

ढुंडत ढुंडत माँ के द्वारे आ गई

तेरे भजनो को मियां भावना से गाउ गई ,

जय जय कारा बोल के सब को संग नचाओ गई,

कष्ट मेरे हरो मेरी विनती सुनो,

भज रही भज रही तेरा नाम.

ढुंडत ढुंडत माँ के द्वारे आ गई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।