भुहा खोल या न खोल कुंडा खड़काई जावागे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भुहा खोल या न खोल कुंडा खड़काई जावागे,

जिह्ना मर्जी तू रूस ले मनाई जावा गये,

भुहा खोल या न खोल कुंडा खड़काई जावागे,

तेरे गुस्से च भी साहनु यह प्यार लभ दा,

तेरे रूप विच हुँदा है दीदार रब दा तेरे गुस्से न वि प्यार च रलाई जावा गये,

भुहा खोल या न खोल कुंडा खड़काई जावागे,

ऐसी जान दे हां मावा बस मावा हुन्दियां जिद्दी चुनी हेठा ममता दिन शावा हुन्दियां,

ओह्दी चुनी हेठा खुद न लुकाई जावा गये,

भुहा खोल या न खोल कुंडा खड़काई जावागे,

धीया पुत्ररा दे तनु किहने माँ कहना है दूर पुत्र दे तनु भी नहीं चैन पीना है,

नाता माँ पूत वाला निभाई जावा गये,

भुहा खोल या न खोल कुंडा खड़काई जावागे,

तेरी मर्जी है ठोकरा भी मार माये नई ऐसी छड़ के नहीं जाना तेरा द्वार माये नई,

दास तेरे है और तेरे ही कहाई जावा गये,

भुहा खोल या न खोल कुंडा खड़काई जावागे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।