मन तड़पत हरि दरशन को आज

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विष्णु भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन तड़पत हरि दरशन को आज ॥

मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज ।

आ विनती करत हूँ रखियो लाज ॥

तुम्हरे द्वार का मैं हूँ जोगी

मेरी ओर नजर कब होगी

सुन मेरे व्याकुल मन की बात ॥

बिन गुरू ग्यान कहाँ सेे पाऊं

दीजो दान हरि गुन गाऊं

सब गुनी जन पे तुम्हारा राज ॥

मुरली मनोहर आस न तोड़ो

दु:ख भंजन मेरा साथ न छोड़ो

मोहे दरशन भिक्षा दे दो आज ॥

द्वारा : योगेश तिवारी है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।