चल चलिए दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चल चलिये दरबार मैया दी चल चलिये,

चल करिए दीदार मियाँ दे चल चलिये,

चल चलिये दरबार......

उचियाँ पहाडा दियां ठंडियाँ हवावा,

भगता दियां फड लेनदियाँ बाहा,

भगता नु करदी प्यार मइयां दे चल चलिये ,

चल चलिये दरबार......

उचियाँ पहाडा उते पीपला दी छावा,

टेडे मेडे मइया तेरे पवना दी रहावा,

सबना ते कर उपकार मइया दे चल चलिये,

चल चलिये दरबार......

उचियाँ पहाड़ा उते कंजका दी टोली,

उचा निवा कंजका नु कदे न बोली,

दता माँ दिंदी तार मइया दे चल चलिये,

चल चलिये दरबार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।