मैं बैरागी हूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं बैरागी हूँ मेरी माँ,

चरणों में तेरे कर दियां जीवन शरण लगा दो माँ,

मैं बैरागी हूँ ....

मैं दुःखयारा शरण तिहरा मइयां मुझको देदो सहरा,

भाग जगा दे बिगड़ी बना दे मइया मुझको दर पे भुला ले,

क्यों था नीर बहा था मैया आया तेरे द्वार,

मैं बैरागी हूँ.....

मन अंध्यारा तुम को पुकारा तेरी सेवा तेरी पूजा करी जग सारा,

कैसी तेरी प्रीत मैया कैसी तेरी माया,

मैंने तेरी महिमा मैया समज ना पाया,

मैं भी आस लगा के आया,

मेरी भोली माँ,

मैं बैरागी हूँ

आसार एक है तेरा बाकी सब सपना,

तेरे बिना हे दादी कोई नही अपना,

तू ही दयालु तू ही किरपालु,

सुबह शाम मेरी माई नाम तेरा जपना,

देव श्री तेरे द्वारे आया करो बेडा पार,

मैं बैरागी हूँ ..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।