मेरे साई के अंगना धूम मची है

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॥ पावन पाठ ॥

मंगतो की दर पे भीड़ लगी है,

साई का दर तो इब ने सखी है,

दर पे दीवाने झूम रहे है,

नूरे रूहानी बरखा पड़ी है,

मेरे साई के अंगना धूम मची है,

साई के दर की शान निराली,

खाली न लौटा दर से सवाली,

देख के तेरी सुरतियाँ प्यारी,

कह ती है ये दुनिया सारी,

मेरे साई के अंगना धूम मची है,

साई मेरा शिरडी का वाली,

दर तेरा दरबार है आली,

साई की शान है शाहो वाली,

साई का दर राजा भी सवाली,

मेरे साई के अंगना धूम मची है,

साई ने जिस को अपना बनाया,

उसका नसीबा पल में जगाया,

उम्र भी तेरे दर पे आया,

देने उसको दामन का साया,

मेरे साई के अंगना धूम मची है,

देखा ये जलवा साई का मैंने हो गया दीवाना,

आज ख़ुशी में झूम झूम जाता है ज़माना,

मची है धूम मची है धूम,

नूरे रूहानी मंजर है साई का रूप निराला,

साई की सूरत ने देखो कैसा जादू डाला ,

मची है धूम मची है धूम,

देखा न कोई ऐसा सखी जैसा है शिरडी वाला,

साई ने आंगन हमारा खुशियो से भर डाला ,

मची है धूम मची है धूम,

देख सखी री धूम मची है साई पिया के अंगना,

चाँद सु राजा आकाश के तारे झांके तेरे अंगना,

मची है धूम मची है धूम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।