यारी जदो दी फकीरा तेरे नाल लाइ आ

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॥ पावन पाठ ॥

यारी जदो दी फकीरा तेरे नाल लाइ आ,

मिली ओहदो तो निमानिया नू बादशाही है,

जे साणु रब दा फकीरा राह दिखांदा न,

जे तू साणु भुलैया न गुरु नू मिलौंदा न,

किहने साहनु सिखी वाली रंगत चडोनी सी,

किहने साड़ी बांह बाजा वाले न फदोनी सी,

बेड़ी दुभ जांदी पार जेहड़ी तू लंगाई है,

मिली ओहदो तो निमानिया नू बादशाही है,

यारी जदो दी फकीरा तेरे नाल लाइ आ,

किथे सी औकात ऐसी अम्बारा च उड़ दे,

किथे सी औकात ेहना मंजला च पूज्दे,

रेहन वहन सहन दा ते कहन दा न चज सी,

किते न गुन्हा तू असी विकते रज रज सी,

एहने लायक नही जिह्नी सहनु खैर पाई आ,

मिली ओहदो तो निमानिया नू बादशाही है,

यारी जदो दी फकीरा तेरे नाल लाइ आ,

रब दे प्यारा विशोड़ा किवे चलिये दिल दी सुनाइए किह्नु किहड़ा भुहा मलिये,

आज भी उडीक दियां दिनों रात अखियाँ,

खोरे आजे प्यारा आसा दिल विच राखियाँ,

पहड़ी मौत नालो हुंडी चलनी जुदाई है,

मिली ओहदो तो निमानिया नू बादशाही है,

यारी जदो दी फकीरा तेरे नाल लाइ आ,

गलियां ते कखा वांगु आसा रूस जाना सी,

पुशाना सी किहने कोड़ियां च रुल जाना सी,

किवे लोकी पलका ते सदके बेठोंदे ने,

गगदिया मूल हीरियाँ तो वध पौंदे ने,

एह्हो मेरी नहियो सब तेरी वडयाई एह,

मिली ओहदो तो निमानिया नू बादशाही है,

यारी जदो दी फकीरा तेरे नाल लाइ आ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।