साईं मेरा करदो बेडा पार

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॥ पावन पाठ ॥

साईं मेरा करदो बेडा पार,

झोली मेरी भर दो अब की बार,

आया मैं हार के झोली पसार के,

खाली न जाऊ बाबा अब तेरे द्वार से,

दुखियाँ गरीब की सुन ले पुकार ये,

ताल न देना साई अपने दवार से ,

बेसहारो का ये सहारा अब तो बाबा दो किनारा,

साईं मेरा करदो बेडा पार,.......

दर पे जो आगेया सब कुछ पा गया,

धुनि साई की जबसे सिर पे लगा गया,

मत कुज वि विचार कर तू भी दरबार चल.

चौकठ पे जाके जो भी सिर को झुका लिया,

साई सब की बिगड़ी बनाते भटके हुए को राह दिखाते,

साईं मेरा करदो बेडा पार,

मुख से जयकार कर साई से प्यार कर,

अगले साई को बंदे अब न विचार कर,

विनती इक वार कर भाव से हो पार चल,

नैना हाथो को जोड़े जीवन सवार चल,.

साई सरिता तू नहा ले जीवन अपना सफल बना ले,

साईं मेरा करदो बेडा पार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।