शांति दूत बन कर करते है हम नव युग का निर्माण

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॥ पावन पाठ ॥

परम पिता परमात्मा की हम अमर संतान,

शांति दूत बन कर करते है हम नव युग का निर्माण,

आऒ जन जन के मन में हम ज्ञान के दीप जलाये,

बुरे यत्न के अंधकार को इस जीवन से मिटाये,

मन के जीते जीत जगत में मन के हारे हार.

राग योग से मिलती है अंतर को शक्ति अपार,

प्रेम एकता पवित्र करे विश्व कल्याल.

शांति दूत बन कर करते है हम नव युग का निर्माण,

विशव शांति के लिए करे हम अपना तन मन अर्पण,

आत्म समपर्पण से सम्पूर्ण बनाये सबका जीवन,

नव चोख की नवीन चेतना नया सवेरा लाये,

प्रेम और भाईचारे की गीत सदा हम गए,

इक पिता के बचे है सारे हम है सभी समान,

शांति दूत बन कर करते है हम नव युग का निर्माण,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।