ओ घाटे वाले

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ओ घाटे वाले....…...

बुलाते हैं मेरे अंसुवन, कि सिसके सांसों की सरगम,

कि निशिदिन तुम्हें पुकारे मन....ओ.....हो....

ओ घाटे वाले।

कष्ट पड़ा था श्री राम पे, तुमने ही कष्ट मिटाया,

लाकर के संजीवन बूटी, लखन का जीवन बचाया,

आयी जब बूटी की बात, फिर दौड़े तुम रातो रात,

और लेकर आये संजीवन.....हो....

ओ घाटे वाले....…...

मेघनाथ ने ब्रह्म फ़ांस में, तुमको है आन फँसाया,

शांत रहे तुम हे बजरंगी, ब्रह्मा का मान बढ़ाया,

जय जय बाल ब्रहमचारी, कहती है दुनिया सारी,

ब्रह्मा का निभाया वचन....हो.....

ओ घाटे वाले....…...

"राज" ने आकर दर पे तेरे, तुमसे ही प्रीत लगायी,

दुश्मन हुआ है सारा ज़माना, बन जाओ मेरे सहायी,

मैं चाहूँ इतनी सौगात, रहे सर पर तेरा हाथ,

चरणों में करूँ मैं नमन......हो.....

ओ घाटे वाले....…...

बुलाते हैं मेरे अंसुवन, कि सिसके सांसों की सरगम,

कि निशिदिन तुम्हें पुकारे मन....ओ.....हो....

ओ घाटे वाले।

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संकलनकर्ता :-- राज कुमार टाँक, बुखारा, बिजनौर ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।