सिय सियावल्लभ लाल की सखि

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सिय सियावल्लभ लाल की सखि आरति करिए ।

दंपति छवि अवलोकि के निज नयना धरिए ॥

अंग अनूप सुहावने पट भूषण राजे ।

नेह भरे दोउ रसिक सुभग सिंहासन साजे ॥१॥

मंद मंद मुस्काय के सिया गल भुज डारे ।

ललक लिए उर लाए प्राण प्रीतम निज प्यारे॥२॥

ललनागण बड़भागिनी लोचन फल पावें ।

सेवहिं भाव बढ़ाय के मुदमंगल गावें ॥३॥

चँवर छत्र कोइ लिए बाजने विपुल बजावें ।

प्रेम लता उर उमगि सुमन नचि नचि बरसावें ॥४॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।