होती जहाँ चौकी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुनले तू ध्यान से होती यहाँ चौंकी माता आती है वही,

स्वागत में माँ के तू ना रखना कमी,

किसी चीज की तू न रखना कमी,

दिल से पुकार ले माँ आये गी यही स्वागत में माँ के तू न रखना कमी,

होती जहाँ चौकी होती.....

बड़े कोमल है होते मियां जी के चरण,

फूल श्रद्धा से करना तू अर्पण,

जब प्यार से माँ तुझको निहारे गई तेरे काम झटफट माँ सवारे गी,

ख़ुशी में तू कही पे तू इतराना नहीं,

स्वागत में माँ के तू ना रखना कमी,

होंगे जिस पल तुझे माँ के दर्शन खिल जायेगा मन तेरा हो के प्रशन,

सिर अपना झुकना लेके भावना हर सिद्ध होगी तेरी मनोकामना,

कन्या को पूजना तू भूलना नहीं,

स्वागत में माँ के तू ना रखना कमी,

चितमन में अजीत तू न रखना,

ध्यान माइयाँ जी का तू लगाए रखना,काट जाता है कष्टों का गेरा,

जब घर में लगा हो माँ का डेरा,भूले से भी कभी माँ को भूलना नहीं,

स्वागत में माँ के तू ना रखना कमी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।