दीवाना तेरा आया बाबा तेरी शिर्डी में

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॥ पावन पाठ ॥

है अजब तरह का सामान तेरी शिर्डी में,

आता हिन्दू है मुस्लमान तेरी शिर्डी में।

आए जितने भी परेशान तेरी शिर्डी में,

काम सबके हुए आसान तेरी शिर्डी में॥

दीवाना तेरा आया बाबा तेरी शिर्डी में।

नज़राना दिल का लाया बाबा तेरी शिर्डी में।

मिल मुझको मेरे बाबा, भरनी तुम्हे पड़ेगी,

झोली मैं खाली लाया बाबा तेरी शिर्डी में॥

मैं दीवाना हो गया रे, मैं दीवाना हो गया,

मैं दीवाना हो गया रे, मैं दीवाना हो गया॥

यूँ तो हज़ारो मंजर देखने हैं हसीं मेने,

दिल तो सकूँ पाया, बाबा तेरी शिर्डी में॥

शिर्डी को छोड़ कर मैं कहीं और कैसे जाऊं,

सब कुछ तो यहीं पाया, बाबा तेरी शिर्डी में॥

वो हो राम कृष्ण विष्णु या हो शेरों वाली मैया,

मुझे तू ही नज़र आया सब में, बाबा तेरी शिर्डी में॥

ना ‘हयात’ भूल पाया तेरी शिर्डी का वो मंज़र,

भगवान नज़र आया बाबा तेरी शिर्डी में॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।