चलो वृन्दावन चलिये

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे राधे नाम मुखो बोल के चलो वृन्दावन चलिये,

दर बांके बिहारी जी दा मलिये चलो वृन्दावन चलिये,

इस बांके न किस ने बनाया है,

स्वामी हरिदासी इस न प्रगटाया है,

इस बांके तो जाके बलिहारी चलो वृन्दावन चलिये,

दर बांके बिहारी जी दा मलिये चलो वृन्दावन चलिये,

एह बांकी बिहारी बड़ा प्यारा है,

एह्दे रूप दा दीवाना जग सारा है,

एह्दे दर्श ने जग तो न्यारे चलो वृन्दावन चलिये,

दर बांके बिहारी जी दा मलिये चलो वृन्दावन चलिये,

इस बांके दे जलवे कमाल ने मेले लगदे रंगीले सारा साल ने,

श्यामा कुंड बिहारी बड़े प्यारे चलो वृन्दावन चलिये,

दर बांके बिहारी जी दा मलिये चलो वृन्दावन चलिये,

एथे दर ते रंग रस वसदे ढोल वजदे ते राशिक ने नच्दे,

पाए गूंज दे मधुप जय कारे चलो वृन्दावन चलिये,

दर बांके बिहारी जी दा मलिये चलो वृन्दावन चलिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।