अहो राम गुरुवर

पारंपरिक
श्री राम भजन जैन भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

अहो राम गुरुवर चरण में तुम्हारे,

स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे

अहो राम गुरुवर चरण में तुम्हारे,

स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,

हो संयम सुमेरु,कठिनतम क्रियाधर,

बहे दिव्य वाणी,हो जैसे सुधाकर,

प्रतिबोध पाते भविक जीव सारे,

स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,

अहो राम गुरुवर......

कहीं और देखा ना,अद्भुत अतिशय,

तेरा नाम लेते ही,मिटते सभी भय,

हे भगवन विराजो, हृदय में हमारे,

स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,

अहो राम गुरुवर...

मन की कटोरी में भावों का चंद,

समर्पण के फूलों से करते हैं पूजन,

"कपिल" दीप श्रद्धा से आरती उतारे,

स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,

अहो राम गुरुवर........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।