में दास मन का

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॥ पावन पाठ ॥

मैं दास मन का, हूँ मन का पुजारी ।

मेंरा जन्म लेना विफल हो गया ॥

हुआ भाव करलूं, तपस्या कभी जो ॥

करूँ दूर मुझमे, बुराई भरी जो,

कहा मन ने मेरे ,कभी फिर करूँगा,

यहीं दाँव मन का, सफल हो गया ॥

मैं दास मन का....

करूँ आज समभाव ,साधन कभी जो ॥

आलोचना कर, स्व दोषों को खोजूं,

उसी क्षण किसी मित्र का, फ़ोन आया,

कि धर्म क्रिया में, खलल हो गया,

मैं दास मन का...

सुनूं आज पावन, प्रवचन गुरु का ॥

नया ज्ञान सीखूं, चितारूँ शुरू का ॥

उसी दम जो व्यापार, का मोह जागा,

की सारा नजारा, बदल ही गया,

में दास मन का...

कभी ना की कोशिश, नियंत्रण की मन पे ॥

लगाता है डाके ये, आतम के धन पे,

किया वश में मन को, गुरु राम ने जो,

दर्शन से उनके, 'कपिल' तिर गया ॥

मैं दास मन का...

लेखक

कपिल देवड़ा

रतलाम (म.प्र.)

मो. न. 8989897294

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।