दर दर भटकदे फिरदे सी

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दर दर भटकदे फिरदे सी साहनु चरनी लगाया तू जोगी,

साहनु जाने कौन गरीबा न साडा मान वदाया तू जोगी,

दर दर भटकदे फिरदे सी....

ऐसी सूखे पते दे वांगु गम दी नेहरी विच उलझ गये,

ज़िंदगी सी कठिन सवाल सारे तेरी इक निगहा नाल सुलझ गये,

सारे भरम भुलेखे दूर होये ऐसा कर्म कमाया तू जोगी,

दर दर भटकदे फिरदे सी.....

दुखा दी घडी सिर ते मेरे जोगी तू मेहरा वाली छा करती,

मैनु ऊधो न चरनी तू लाया जदो सारे जग ने ना करती,

सब संगी साथी छड़ गये सी साहनु अपना बनाया तू जोगी,

दर दर भटकदे फिरदे सी...

साढ़े राह विच हनेरा सी मंजिल सी लगदी दूर बड़ी,

बिन रेहमत धर्मकोटि दी ज़िंदगी भी सी बेनूर बड़ी ,

दास प्रीत निमाणे दा इक साथ निभाया तू जोगी,

दर दर भटकदे फिरदे सी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।