नाथ कब आओगे

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॥ पावन पाठ ॥

मैं चिठियााँ,,,, हो मैं चिठियााँ,,,,

मैं चिठियााँ लिख लिख हारी,

कब आओगे बाबा पौणाहारी,

हो नाथ कब आओगे, बाबा कब आओगे ,

पहले जै बाबे दी लिखा है ll

फिर चरणों में प्रणाम लिखा है ll

मैंने चिठियााँ पे, चिठियााँ डाली,

हो नाथ कब आओगे, बाबा कब आओगे ll

मैं चिठियााँ लिख लिख,,,,,,,,,,,,,,,,,

दूजी चिठ्ठी में यह लिख डाला ll

घर आओ मेरे रत्नो के लाला ll

तेरे भगतो ने, बाट निहारी,

हो नाथ कब आओगे, बाबा कब आओगे ll

मैं चिठियााँ लिख लिख,,,,,,,,,,,,,,,,,

अब चिठियााँ, और ना लिखेंगे ll

टेलीफोन या, फैक्स अब करेंगे ll

हम डायरेक्ट, बात करेंगे,

हो नाथ कब आओगे, बाबा कब आओगे ll

मैं चिठियााँ लिख लिख,,,,,,,,,,,,,,,,,

बाबा भगतो को भूल ना जाना ll

दुनियााँ मारेगी हमको ताहना ll

हँसी होगी, जग में तुम्हारी,

हो नाथ कब आओगे, बाबा कब आओगे ll

मैं चिठियााँ लिख लिख,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

धुन- ऐ थेवा मुँदरी दा थेवा

अपलोड कर्ता- अनिल रामूर्ति भोपाल बागहिओ वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।