तन मन सब तेरा है एहो अरजोई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तन मन सब तेरा है एहो अरजोई है,

तनु दसा तेरे बिन माँ मेरा होर न कोई है,

अखियां विच सूरत तेरी तेरा सिर ते साया है,

सारा जग महारानी तेरे करके भुलाया है,

तेरे नाम हो मदहोश सारी सूरत समोई है,

तनु दसा तेरे बिन माँ मेरा होर न कोई है,

ना मैं कोई राजा तेरे दर दा भिखारी माँ,

रह तेरे चरना च कट लू मैं ज़िन्दगी सारी माँ,

दर दर जा क्यों भटका तू ही करनी तोहि है ,

तनु दसा तेरे बिन माँ मेरा होर न कोई है,

गलियां विच सी मैं रुलदा फड् ऊँगली लाया माँ,

मेरी एहनी औकात नहीं सी जिह्ना झोली पाया माँ,

मालू माल समीर दी माँ अपने अनमोल दी माँ,

जगाई किस्मत सोइ एह,

तनु दसा तेरे बिन माँ मेरा होर न कोई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।