लाड़ा तेरा गिठा नी ओ गौरजा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लाड़ा तेरा गिठा नी ओ गौरजा,

दाधा गज गज लमक रेहा,

बुढ्डा बाबा नी ओ गौरजा जिदे नाल लगी तू करन विआह,

काले काले नाग उन्हे गल विच पाये ने,

उहने सिर ते मलि सवाह जिदे नाल लगी तू करन विआह ,

लाडा तेरा.......

जिस्दिया सिफ्ता कर कर गौरा कोमल होठ सुखाये ,

ओ बूढ़ा विच बाग दे बैठा भंग दे रगडे लाये,

लाडा तेरा........

नाजुक चन जही गौरा सह्डी धोखा खा गये मापे,

तोडी दह्ड़ी जीजा आया बापू सह्डा जागे,

लाडा तेरा........

लोक बजांदे बैंड बाजे ओ शंक बजान्दा आया,

हाथी घोड़े चढ़के देखो बैल सवारी आया,

लाडा तेरा.......

गौरा तेरे बापू ने एह की जुलम कमाया,

सोहना राजकुमार छड़के बूढ़े नाल विआहाया,

लाडा तेरा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।