मैनु तेरे चरना च ठिकाना चाहिदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ना ही सोना चांदी ना ही खजाना चाहिदा,

मैनु तेरे चरना च ठिकाना चाहिदा,

ठिकाना चाहिदा ठिकाना चाहिदा,

तू मालिक दुनिया दी तू ही जगत बनाया है,

की खेड़ रचाये तू कोई समज न पाया है,

सब झूठे रिश्ते ने सब झूठी मोह माया है,

जद भी मैं आजमाया कोई कम ना आया है,

मैनु रिश्ते नाते ना ज़माना चाहिदा,

मैनु तेरे चरना च ठिकाना चाहिदा,

तेथो माँ है की लुकियाँ किस हाल च रहना है,

अखियां विच वगदे जो अथुरु पी लेना हां,

हर रोज ही मार दा हां मर मर के जिन्दा हां

उप मुँह तो नहीं कर दा मैं बुल्ल सी लेना है,

पुंज के हंजू माँ गल लाना चाहिदा,

मैनु तेरे चरना च ठिकाना चाहिदा,

हर पासे कंडे ने हर मुश्किल राहवा ने,

दुःख दर्द दी धूपा च किते दिखन न चाहवा ने,

अखियां विच हंजू ने भूल्या ते हावा ने,

तू चिन्दियाँ सुनाई नई तनु मेरियन सेहलावा ने,

एहना भी नि दास न सताना चाहिदा,

मैनु तेरे चरना च ठिकाना चाहिदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।