अब तो अपनी नगरियां भुला लो देवी माँ,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अपने चरणों से हमको लगा लो देवी माँ,

अब तो अपनी नगरियां भुला लो देवी माँ,

दूर बनी है मियां तुमरी दुअरियाँ ,

लम्बा रस्ता कठिन डगरिया,

राह आ कर के हम को दिखा दो देवी माँ,

अब तो अपनी नगरियां भुला लो देवी माँ,

तुम बिन मियां मोहे कशू ना सुहाए,

रात अँधेरी है जिया गबराये,

अपने आंचल में हम को छुपा लो देवी माँ,

अब तो अपनी नगरियां भुला लो देवी माँ,

किसको मैं जाके अपनी विपदा सुनाऊ,

सुन लो विनती तुमको सुनाऊ,

सोइ किस्मत को आके जगा दो देवी माँ

अब तो अपनी नगरियां भुला लो देवी माँ,

जीत अमीर मइयां तेरे गुण गाये,

बैठे राहो में पलके बिशाये,

मोहनी मूरत को अपनी दिखा दो देवी माँ,

अब तो अपनी नगरियां भुला लो देवी माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।