शेर पे सवार चली अम्बीके भवानी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

शेर पे सवार चली अम्बीके भवानी,

अम्बीके भवानी जगदम्बे के भवानी,

आगे है बजरंगी भक्तो के सुख संगी,

जिन्हे देख के डर के मारे भाग जाये,

हुड दंगी लाल ध्वजा हाथो में लेके चले करत अगवानी,

शेर पे सवार चली अम्बीके भवानी,

माँ का सिंघा प्यारा रन में कभी न हारा बड़े बड़े असुर को पटक पटक के मारा,

सिंह राज से शक्ति शाली माँ का वर्धनी,

शेर पे सवार चली अम्बीके भवानी,

भेरो वीर निराला मैया का रखवाला,

काली माँ के रक्त से जन्म तन है काला काला,

ज्वाला जिसके नेत्र से निकले कर दुश्मन की हानि,

शेर पे सवार चली अम्बीके भवानी,

भक्तो की प्रतिपाली मैया शेरावाली.

वो देखो वो आ गई मैया मिल के भजाओ ताली,

खाली दामन भरने आई जगजन नी कल्याणी,

शेर पे सवार चली अम्बीके भवानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।