क्यों आ के रो रहा है गोविन्द की गली में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

क्यों आ के रो रहा है, गोविन्द की गली में।

हर दर्द की दवा है, गोविन्द की गली में॥

तू खुल के उनसे कह दे, जो दिल में चल में चल रहा है,

वो जिंदगी के ताने बाने जो बुन रहा है।

हर सुबह खुशनुमा है, गोविन्द की गली में॥

तुझे इंतज़ार क्यों है, किसी इस रात की सुबह का,

मंजिल पे गर निगाहें, दिन रात क्या डगर क्या।

हर रात रंगनुमा है, गोविन्द की गली में॥

कोई रो के उनसे कह दे, कोई ऊँचे बोल बोले,

सुनता है वो उसी की, बोली जो उनकी बोले।

हवाएं अदब से बहती हैं, गोविन्द की गली में॥

दो घुट जाम के हैं, हरी नाम के तू पी ले,

फिकरे हयात क्यों है, जैसा है वो चाहे जी ले।

साकी है मयकदा है, गोविन्द की गली में॥

इस और तू खड़ा है, लहरों से कैसा डरना,

मर मर के जी रहा है, पगले यह कैसा जीना।

कश्ती है ना खुदा है, गोविन्द की गली में॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।