श्यामा प्यारी मेरे साथ है तो डरने की क्या बात है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छायें कलि घटाएं तो क्या , तेरे आँचल के नीचे हूँ मैं ,

आगे आगे वो चलती मेरे , अपनी श्यामा के पीछे हूँ मैं ,

उसने पकड़ा मेरा हाथ है , फिर डरने की क्या बात है,

श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं.....

इनके रहते कोई कुछ कहे बोलो किस की ये औकात है

उनकी करुना का वर्णन करूँ , मेरी वाणी में वो दम नहीं ,

जबसे तेरा सहारा मिला, फिर सताए कोई ग़म नहीं ,

करती ममता की बरसात है, मेरी लड़ो की क्या बात है ,

श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं.....

इनके रहते कोई कुछ कहे बोलो किस की ये औकात है

क्यों तू भटके यहाँ से वहां , इनके चरणों में आ बैठ न ,

छोड़ दुनिया के नाते सभी, श्यामा प्यारी से नाता बना ,

ये कराती मुलाक़ात है , मेरी श्यामा की क्या बात है ,

श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं.....

इनके रहते कोई कुछ कहे बोलो किस की ये औकात है

गर हो जाये करुना नज़र , बरसाना बुलाती हैं ये,

दिल क्यों न दीवाना बने, हिरदये से लगाती है ये ,

प्यार करने में विख्यात है,मेरी लाडो की क्या बात है ,

श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं.....

इनके रहते कोई कुछ कहे बोलो किस की ये औकात है

पंडित देव शर्मा बृजवासी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।