हे माँ मेरी माँ प्यारी माँ न्यारी माँ

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे माँ मेरी माँ प्यारी माँ न्यारी माँ,

हे माँ,मेरी माँ, प्यारी माँ, न्यारी माँ,

दुर्गा महारानी माँ,शारदाभवानी माँ,

वैष्णोंमहारानी माँ, सरस्वतीकल्याणी माँ,

हे माँ,मेरी माँ,प्यारी माँ,न्यारी माँ.....

ब्रह्मरूपिणी माँ, विष्णुस्वरूपिणी माँ,

रुद्ररूपिणी माँ, शक्तिस्वरूपिणी माँ,

हे माँ,मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ.......

ब्रह्मवादिनी माँ, सिद्धिदायिनी माँ,

बुद्धिदायिनी माँ , धर्मधारिणी माँ,

हे माँ, मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ....

व्याधिनाशिनी माँ, भयहारिणी माँ,

भवभामिनी माँ, भवतारिणी माँ,

हे माँ,मेरी माँ,प्यारी माँ,न्यारी माँ.......

परधामनिवासिनी माँ, महाविलासिनी माँ,

शमशानबिहारिणी माँ, ताण्डवलासिनी माँ,

हे माँ, मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ........

विद्यादायिनी माँ, विज्ञानप्रदायिनी माँ,

ज्ञानदायिनी माँ, शुभवरदायिनी माँ,

हे माँ,मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ......

मृगवाहिनी माँ, शूलधारिणी माँ,

खड्गधारिणी माँ, त्रिशूलधारिणी माँ,

हे माँ,मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ......

शत्रुविनाशिनी माँ, सौभाग्यदायिनी माँ,

विश्वमोहिनी माँ, सौभाग्यशालिनी माँ ,

हे माँ, मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ........

दुर्गसाधिनी माँ, दुर्गनाशिनी माँ,

वरदायिनी माँ,दुर्गदारिणी माँ,

हे माँ, मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ.....

विश्वार्तिहारिणी माँ, मुक्तिप्रदायिनी माँ,

पापनाशिनी माँ, शोकविनाशिनी माँ,

हे माँ, मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ.....

निशुम्भमर्दिनी माँ, शुम्भविनाशिनी माँ,

सर्वास्त्रधारिणी माँ, चण्डमुण्डघातिनी माँ,

हे माँ, मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ...

वीणाधारिणी माँ, हंससुबाहिनी माँ,

वैभवशालिनी माँ, भयविनाशिनी माँ,

हे माँ, मेरी माँ,प्यारी माँ, न्यारी माँ.......

सुरमुनिमोहिनी माँ, ज्ञानरूपिणी माँ,

ब्रह्मचारिणी माँ, सिंहवाहिनी माँ,

हे माँ,मेरी माँ ,प्यारी माँ, न्यारी माँ.....

हे माँ,हे माँ, हेे माँ, हे माँ,

मेरी माँ, मेरी माँ, मेरी माँ मेरी माँ,

प्यारी माँ,प्यारी माँ,प्यारी माँ,प्यारी माँ,

न्यारी माँ,न्यारी माँ, न्यारी माँ, न्यारी माँ....

साभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।