हज़ारी कबूल करनी माइयाँ जी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हज़ारी कबूल करनी माइयाँ जी साडी हज़ारी कबूल करनी,

बच्चियां नु ला लै चरनी माइयाँ जी साडी हज़ारी कबूल करनी,

ज्योत तेरी दर ते जगौण आये हां,

हनेरी ज़िंदगी नु रुशहौं आये हां,

अपने गुन्हा बक्शों आये हां,

चरना दी धूल मथे लौन आये हां,

तेरे आगे अर्जियां पान आये हां,

पता नहीं किठो ऐसी कौन आये हां,

तू सी जो लिखाये बोल गान आये हां,

संगता दे दर्शन पान आये हां,

संगता ने चौंकी भरनी माइयाँ जी साडी हाज़री कबूल करनी

सच्चे दिलो जदो फर्यादा हुन्दियां माँ दे दरों पूरियां मुरदा हुन्दियां,

जेहड़ा उचा बोलियां ओ गया संजो एथे किसे नाल ना लिहाजा हुन्दियां,

अकबर माँ दे दर उचा बोलियां सोना माँ ने कोडियां दे भा तोलियाँ,

शीश माँ दे चरना च राखियां कहंदा माफ़ करि मइयाँ उचा नीवा बोलियां,

करनी ता पेनी भरनी माइयाँ जी साडी हाज़री कबूल करनी,

मइया मेरी लाड लड़ये तू सा ने दीप उते कर्म कामये तु सा ने,

ऐब साढ़े किहने ही छुपाये तू सा ने साढ़े जहे गरीब गल लाये तू सा ने,

थले बैठे तखत बिठाये तू सा ने किठो चक किथे बिठाये तू सा ने,

तुहदे जिह्ना ना कोई हाथ दा सखी दावे हथि नोट बरसाए तू सा ने,

साडी नीत नहीं भरनी माइयाँ जी साडी हज़ारी कबूल करनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।