गुरा दी मेहर वसे दिन रात

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॥ पावन पाठ ॥

सावन कदे कदे वसदा,

गुरा दी मेहर वसे दिन रात,

किदरे चुका किदरे जल थल ओ सावन तर जावे,

मेहर गुरा दी सब दे वेह्डे सुख ही सुख बरसावे ,

सावन कदे......

वसे ते थोडी रहमत मिल्दी रुके ते फेर पसीना,

जनम जनम दी सबर मिटावे गुरा दा नाम नगीना ,

सावन कदे......

देश ते परदेस है एहना एहना दे अजब नजारे,

गुरा दी मेहर सदा ही बरसे लखा पापी तारे,

सावन कदे......

साल बाद एह सावन आन्दा दिल तरसा तरसा के,

मेहर दा सागर ऐथे वगदा खालो घोटे आके,

सावन कदे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।