खुशियां ही खुशियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ ने बात बना दी है अब खुशियां ही खुशियां,

लॉटरी अब लगवा दी है अब खुशियां ही खुशियां,

रंक से राजा मुझे बना कर किस्मत मेरी जगा दी है,

अब खुशियां ही खुशियां...

ध्यन हो गया जीवन मेरा पाई जो ये सौगात है,

देने लगे सब मुझको वधाईयां कह के क्या बात है,

माँ के रंग में खुद को रंगा कर माँ की ज्योत जला दी है,

अब खुशियां ही खुशियां....

जब जब जो भी मांगा माँ से तब तब दियां है मुझको माँ ने,

कर्म किया जा तू भी अपने खुशियां देगी माँ तुझको,

हिरदये में अपने माँ को वसा कर माँ से लग्न लगा ली है,

अब खुशियां ही खुशियां.....

जीवन के हर कठिन मोड़ पर माँ ने राह दिखाई है,

महकाया हर गुलशन माँ ने बन के सदा सहाई है,

शरण में आये दास पवन की बिगड़ी बात बनाती है,

अब खुशियां ही खुशियां...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।