ओये मइयां दे नवराते आ गये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बच्चे बूढ़े ये जवान सारे चावा नाल जान,

देखो खड़ियाँ ने गाड़ियां शृंगारियाँ,

ओये मइयां दे नवराते आ गये,

सारे खींच लावो भगत त्यारियां,

ओये मइयां दे नवराते आ गये,

माता दे द्वारे उते नित भावे जांदियाँ ही रेहन संगता,

वखरा ही आनंद है नराते दे दिना विच केहन संगता,

खूब लग दियां रोनका ने भारियाँ,

ओये मइयां दे नवराते आ गये,

माता चाहे पल विच जल नाल भर दवे,

सूखे थल नु संगता दे हड़ नु ना भीड़ कह के हासे च उडायो गल नु,

वरि आनदियां ने सूखा एथे सरियाँ,

ओये मइयां दे नवराते आ गये,

किती माता दी ना दीद किवे माता तेरे उते जावे रीज बन्दियाँ,

भुटा नाम वाला छड़ रहा कीकारा दे बीज ता तू बीज बन्दिया,

सुमि भाल दा केसर क्यारियां,

ओये मइयां दे नवराते आ गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।