चौसठ जोगणी रे भवानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

देवा में देवी बड़ी, और बड़ी जगदम्बे माय,

लज्जा मोरी राखियो, कीजो म्हारी सहाय,

कीजो म्हारी सहाय, शरण में आया तेरी,

जगदम्बे महारानी माँ, लाज रख दीजो म्हारी,

देवलिये रमजाय म्हारे, आंगणिये रमजाय,

चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय,

घूमर घालणि रे भवानी, देवलिये रमजाय,

हंस सवारी कर मोरी मैया, ब्रम्हा रूप बणायो,

ब्रम्हा रूप बणायो नवदुर्गा, ब्रम्हा रूप बणायो,

चार वेद मुख चार बिराजे, चारा रो जस गायो,

घूमर घालनी रे भवानी, देवलिये रमजाय,

गरुड़ सवारी कर मेरी मैया, विष्णु रूप बणायो,

विष्णु रूप बणायो नवदुर्गा, विष्णु रूप बणायो,

गदा पदम संग चक्र बिराजे, मधुबन रास रचायो,

घूमर घालनी रे भवानी, देवलिये रमजाय,

नंदी सवारी कर मेरी मैया, शक्ति रूप बणायो,

शक्ति रूप बणायो नवदुर्गा, शक्ति रूप बणायो,

जटा मुकुट मै गंगा खळके, शेष नाग लीपटायो,

घूमर घालनी रे भवानी, देवलिये रमजाय,

सिंघ सवारी कर मेरी मैया, शक्ति रूप बणायो,

शक्ति रूप बणायो नवदुर्गा, शक्ति रूप बणायो,

सियाराम तेरी करे स्तुति, भक्त मंडल जस गायो,

घूमर घालनी रे भवानी, देवलिये रमजाय,

चौसठ जोगणी भवानी, देवलिये रमजाय,

घूमर घालणि रे भवानी, देवलिये रमजाय,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।