मन में इक हलचल है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन में इक हलचल है होती याद तेरी जब आती है,

कितना भी रोकू मैं बाबा आँख मेरी भर आती है,

मन में इक हलचल है होती याद तेरी जब आती है,

भुला नहीं मैं अब तक बाबा गम की वो राते काली,

तेरे बिना कैसे थी बिताई क्या होली क्या दिवाली,

बीते पलो को सोच की मेरी रूह बहुत थर्राती है,

मन में इक हलचल है होती याद तेरी जब आती है,

मेरी तरफ रुख तूफ़ान का था खुद को तुम पर छोड़ दिया,

मोरछड़ी क्या घूमी तेरी हर दुःख ने दम तोड़ दिया,

गम की आंधियां भी अब बाबा ठंडी हवा बन जाती है,

मन में इक हलचल है होती याद तेरी जब आती है,

ज़िंदा हु बस तेरी बदौलत वरना कब का मर जाता,

हाथ जो तेरा सही समय पर मेरे सिर पे ना आता,

मौत भी सोच में डूबी अब तो दूर खड़ी गबराती है,

मन में इक हलचल है होती याद तेरी जब आती है,

जो दुःख में बहते थे आंसू अब सुख में न रुकते है,

ये आंसू तो हर बूंदो में शुक्र तेरा करते है,

साहनु कह ना पाता जो भी आंखे ये कह जाती है,

मन में इक हलचल है होती याद तेरी जब आती है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।