मेरा जोगिया बोले एक तारा

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा जोगिया बोले एक तारा,

तुम्बा तुनक तुनक बोले,

सब्दा मालिक एक है साईं सचा साईं बोले,

किसे नु माडा कदे ना बोली,

रब दा तराजू बोले,

मेरा जोगियां बोले एक तारा तुम्बा तुनक तुनक बोले,

सच्चा सोदा एको इथे शान और मान ते खाई जा,

मौजी बन के रजा ते ओहदी ओहदे राग सुनाई जा,

राह जाने ते राह पशाने मन दा धागा डोले,

मेरा जोगिया बोले एक तारा,

जे मिल जावे सरदारी ते नीवा हो के चलिये,

ओहदे आगे झुकड़े वेखे मान कदी न करिए,

सब ने अपना रूप दिखाना,

यार बड़े ने अन्मुले,

मेरा जोगिया बोले एक तारा,

माँ पयो रब दा रूप है योगी बिन झोली दे जोगी,

सजन सोनी तू की लेना अपने आप ही भोगी,

सखी सहेली मेला रंग दा भेद दिला दे खोले,

मेरा जोगिया बोले एक तारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।