गुरु चरना विच रह के कसमा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गुरु चरना विच रह के कसमा खावागे

दिन होवे या रात हरि गुण गावागे

छोटा सा सागर है

भरनी असा गागर है

असी वी भर के गागर घर नु जावांगे

दिन होवे या रात हरि गुण गावागे

गुरु चरना......

गंगा प्रेम दिया पकिया नु

कोई तोड नही सकिया

ऐना गंगा नु पकिया होर वी असी पावांगे

दिन होवे या रात हरि गुण गावागे

गुरु चरना........

बंसी सावरे दी बज रही है

प्यारी राधा नच रही है

असी वी बन्सि सुन सुन नच दिखावागे

दिन होवे या रात हरि गुण गावागे

गुरु चरना......

जग रूस्दा ता रूस जावे

जग दी परवा कोई ना सावरा ना रूस जावे

सावरे नु असी आप मनावागे

दिन होवे या रात हरि गुण गावागे

गुरु चरना........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।