तू प्रभ दाता दान मत पूरा

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॥ पावन पाठ ॥

सतनाम श्री वाहेगुरु,

तू प्रभ दाता, दान मत पूरा,

हम थारे, भीखारी जिओ,

मैं क्या माँगू किछ थीर ना रहाई,

हर दीजै नाम प्यारी जिओ

तू प्रभ दाता...

घट-घट रव रह्या बनवारी,

जल-थल महिअल गुप्तो वरतै,

गुरु शब्दि देख निहारी जीओ,

तू प्रभ दाता..

मरत प्याल, आकाश दिखायो,

गुरु सतगुर कृपा धारी जिओ,

सो ब्रम्ह अजोनि है भी होनी,

घट भीतर देख मुरारी जिओ,

मैं क्या माँगू,

तू प्रभ दाता...

जन्म-मरण को, एहो जग बपड़ों,

इन् दूजै भगत विसारि जिओ,

सतगुरु मिलै ता गुरमत पाइये,

साकत बाजी हारी जिओ,

मैं क्या माँगू...

सतगुरु बंधन तोड़ निरारे,

बहोर ना गर्भ मंझारी जिओ,

नानक ज्ञान रतन परगास्यां,

हर मन वस्या निरंकारी जिओ,

मैं क्या माँगू...

तू प्रभ दाता।।।

सतनाम वाहेगुरु।।।

सौरभ सोनी

सरिया, गिरिडीह

झारखंड, 825320

8210062078

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।