बोल्या सब किछ जांदा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बिन बोल्या सब किछ जांदा,

किस आगे कीजिये अरदास,

बबिहा सगळी धरती जे फिरेह,

उड़ चढ़े आकाश,

बिन बोल्या.....

सतगुरु मिलिए जल पाइये,

चूके भूख प्यास,

बिन बोल्या .......

जियो पिंड सब तिस का,

सब किछ तिस कै पास,

बिन बोल्या.....

नानक घट-घट एको वरतदा,

शब्द करै प्रगास,

बिन बोल्या......

वाहेगुरु, वाहेगुरु,

सौरभ सोनी

सरिया, गिरिडीह

झारखंड

8210062078

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।