भूल चुक दिलो विसार

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॥ पावन पाठ ॥

भूल चुक दिलो विसार असी ओगन हारे,

तू है बक्शन हार असी ओगन हारे,

बचिया दी भुला नु चेते ल्यावी ना,

ममता प्यार दुलार च फर्क तू पावी न,

माँगिये प्यार दुलार असी ओगन हारे,

भूल चुक दिलो विसार असी ओगन हारे,

हर दम एह अरदास करी तेरी द्वारे,

अटके बेड़े दातिया तू लखा तारे,

हूँ सहनु भी तार असी ओगन हारे,

भूल चुक दिलो विसार असी ओगन हारे,

की कहिये की कहना है की कह सकदे,

एहना ही काफी है चरनी बेह सकिये,

तू करता करतार असी ओगन हारे,

भूल चुक दिलो विसार असी ओगन हारे,

दुनिया दे विच रह के दुनियादार होए,

साहिल मोह माया दे खिदमत दार होए,

बस इक बार निहार असी ओगन हारे,

भूल चुक दिलो विसार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।