सारे द्वारे छोड़ आया मैं तो बड़े मंदिर में

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सारे द्वारे छोड़ आया मैं तो बड़े मंदिर में,

दर आया की लाज तू रखना,

अपनी किरपा का हाथ तू रखना,

सरे द्वारे छोड़ आया मैं तो बड़े मंदिर में,

तेरे दर का जो बना सवाली,

झोली रही ना उसकी खाली,

सारे द्वारे छोड़ आया बड़े मंदिर में,

दर आया की लाज तू रखना,

अपनी किरपा की हाथ तू रखना,

सारे द्वारे छोड़ आया बड़े मंदिर में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।