हर साल साहनु तू भुलाई शेरावालिये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इहो साड़ी आस है पुजाइ शेरा वालिये,

हर साल साहनु तू भुलाई शेरावालिये,

पूत जीवे आंदा घर खेल के श्याम नु,

जिस तरह कौशलया मात उडीक दी सी मात नु,

साड़ियां उडीका ओहदा लाइ मेहरा वालिये,

हर साल साहनु तू भुलाई शेरावालिये,

सीपियाँ दे नाल मइयां सागर नई मिल जाने,

साढ़े यह बे आंत पाप तेतो नहीं गिने जाने,

उतो साडा खाता ही मिटाई लाता वालिये,

हर साल साहनु तू भुलाई शेरावालिये,

पाप आज किती माता बकश दे आखिर तू,

एहना उते फेर दे तू मेहर दी लकीर तू,

बच्चियां नु आगा तो बचाई मेहरा वालिये,

हर साल साहनु तू भुलाई शेरावालिये,

रोंदे नहीं माता पग हंजुआ दा हड़ जावे,

चरना दी बाण गंगा धुनि ना चढ़ जावे,

देके साहनु लोरियां जगाई शेरा वालिये,

हर साल साहनु तू भुलाई शेरावालिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।