आरती नागोवाली माँ की

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॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय नागोवाली,

मैया जय नागोवाली॥

जो भी दर पे आये, जाए ना खाली॥

ॐ जय नागोवाली॥

तिरुमलगिरी मैं बन्यो देवरों,

शोभा अति प्यारी,

हो मैया शोभा अति प्यारी।

दर्शन करने थारे, आवै नर नारी॥

ॐ जय नागोवाली॥

कंठन पर जड़ाऊ हर थारे, टीको मस्तक पर।

नाक पर थारे नथनी, बाली काना पर॥

ॐ जय नागोवाली॥

धेनु दूध को भोग लगावा, नारियल भेंट धरा॥

छप्पन प्रकार का व्यंजन, थारी मनोहार करां॥

ॐ जय नागोवाली॥

ढोल, मृदंग, घडियावल बाजै॥

नौबत, द्वार सजे,

थारे नाम का डंका चारो ओर बजे।

ॐ जय नागोवाली॥

भांति-भांति का आवे फरियादी,

थासू अरज करे, जो कोई शरण मे आवे उसकी विपदा हरे॥

ॐ जय नागोवाली।।

निस दिन थारी करां आरती, थे हो लखदातार,

भक्त भी मैया दास तिहारो, भरया रखो भंडार॥

ॐ जय नागोवाली ॥

नागोवाली माँ की आरती जो कोई नर गावै, जो सुंदर गावै॥

बांके पाप उतर जावे, बाँके घर लक्ष्मी आवे,

कहत शिवानंद स्वामी, कहत हरिहर स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

ॐ जय नागोवाली॥

प्रदीप शर्मा

सरिया, गिरिडीह

झारखंड।।

8340519841

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।