ज़िन्दगी हार गयी दर पे बुला लो साईं

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॥ पावन पाठ ॥

ज़िन्दगी हार गई दर पे भुला लो साईं,

अपने दीवाने को दीदार दिखा दो साईं,

सब दिया तूने मगर एक तमना बाकि,

दवारका माई का वो जलवा दिखादो साईं,

ज़िन्दगी हार गई दर पे भुला लो साईं..

तूने पानी से दीये खूब जलाये बाबा,

मेरी आशा के भी अब दीप जला दो साईं,

ज़िन्दगी हार गई दर पे भुला लो साईं,

अपने दीवाने को दीदार दिखा दो साईं,

ये ज़माना मुझे ठुकराए मुझे क्या गम है,

अपने चरणों में मुझे आप बिठा लो साईं,

ज़िन्दगी हार गई दर पे भुला लो साईं,

उम्र भर आप की चाहत को तरस ता मैं रहा,

आखिरी पल में गले मुझको लगा लो साईं,

ज़िन्दगी हार गई दर पे भुला लो साईं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।