अमृत वाणी हर हर तेरी

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॥ पावन पाठ ॥

अमृत वाणी हर हर तेरी,

सुन सुन होवे परम गत मेरी,

जलन बुझी शीतल हुवे मनवा

सतगुरु का दर्शन पाए जिओ,

अमृत वाणी.....

सुख भया दुख दूर पराना,

संत रशन हर नाम वखाना,

जल-थल-नीर भरे सर शुब्र,

विरथा कोई ना जाये जिओ,

अमृत वाणी.....

दया धारी तीन सृजन हारे,

जी-जंत सगळे प्रत पारे,

मेहरवान कृपाल दयाला,

सगळे तृप्त अघाये जिओ,

अमृत वाणी.......

बन तृन भवना, कितो हरया,

कर्णहार खिन भीतर करया,

गुरुमुख नानक तिसै अराधे,

मन की आश पुराये जीओ,

अमृत वाणी.......

सौरभ सोनी

सरिया

8210062078

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।