म्हारी मावड़ी को आयो है सन्देश

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

म्हारी मावड़ी को आयो है सन्देश ले चालो माहने पीहर,

महारी दादी जी को आयो है सन्देश ले चालो माहने पीहर है,

महारो मन में चाहव रावे कब आवे भादो मॉस

कब हो सीता जी से मिलनो हिवड़े में जागी माहरे आस,

ले चालो माहने पीहर में महारी दादी जी को आयो है सन्देश,

दादी महारी भोली भाली जाने ना कोई रीत,

टाबरियां री बात उडी के मावड़ी ली आ ही प्रीत,

ले चालो माहने पीहर में महारी दादी जी को आयो है सन्देश,

अनु मेले पाछी आवा जीब घणो दुःख पाए,

सर पे हाथ फिरावे दाती हिवड़े से लेवे लिपटाये ,

ले चालो माहने पीहर में महारी दादी जी को आयो है सन्देश,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।