सावन सुहाना समां

स्वर्गवासी श्री खेत पाल जी ' पाल '
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सावन सुहाना समां, आये है लाखों यहाँ ।

ऐसे में आजा, दर्शन दिखा जा, बैठी है अंम्बे कहाँ ।

सावन सुहाना समां...

१. दिन सुहाने आज आये हैं, झंडे दवारे तेरे लाए हैं ।

राहों में नैन बिशाये हैं, सबने शीश झुकाए हैं ।

आजा माँ अंम्बे, जय माँ जगदम्बे, ऊँचा है तेरा निशान ।

सावन सुहाना समां...

२. मन कहे तू आज गाये चल, ज्योति से जोत मिलाए चल ।

नाम की लगन लगाए चल, दर्शन मय्या का तू पाए चल ।

मिलेगी ज्योति, नाम के मोती, मैया शरण में तू आ ।

सावन सुहाना समां...

३.खेल मैया जी तेरे न्यारे हैं, लाखों ही पापी तूने तारे हैं ।

हम तो तेरे ही सहारे हैं, दर्शन को आये तेरे दवारे हैं ।

" पाल " बुलाये, गुण तेरे गाये, गाये है सारा जहाँ ।

सावन सुहाना समां...

लेखक : स्वर्गवासी श्री खेत पाल जी ' पाल '

संगीत : मुन्ना जी, प्रेम जी

गायक : राज कटारिया (राजू मोगेवाला)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।