भक्त भुलाये माँ नहीं आये हो नहीं सकता

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॥ पावन पाठ ॥

माँ के रहते भगत कभी रो नहीं सकता,

भक्त भुलाये माँ नहीं आये हो नहीं सकता,

भगत तो जान है इसकी भगत में प्राण अटके है,

भगत को याद कर कर के इसके दिन रात कट ते है,

और कही पर मैया का दिल नहीं लगता,

भक्त भुलाये माँ नहीं आये हो नहीं सकता,

भगत ठोकर खा कर गिरता इसको चोट आती है,

भक्त के पास में इसकी आत्मा दौड़ जाती है,

मंदिर में रुकना के फिर दिल नहीं करता,

भक्त भुलाये माँ नहीं आये हो नहीं सकता,

चाहे घर में चाहे मंदिर में माँ तो बस माँ ही होती है,

भगत के आँख भर आये तो आँखे माँ की रोटी है,

माँ की तुलना कोई भी कर नहीं सकता,

भक्त भुलाये माँ नहीं आये हो नहीं सकता,

बुरी नजरो से ये मैया बचा के रखती है,

सीने से वनवारी हमको ये मियां लगा कर रखती है,

ऊँगली पकड़ कर रखती बेटा खो नहीं सकता,

भक्त भुलाये माँ नहीं आये हो नहीं सकता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।